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महिला को मुकदमा दर्ज करवाने के लिए डेढ़ साल तक लड़नी पड़ी लड़ाई

आखिरकार पुलिस मजबूर हुई महिला की शिकायत पर मामला दर्ज करने को, महिला को डिजिटल अरेस्ट कर ठगे थे 81000

Satyakhabarindia

सत्य खबर हरियाणा

Cyber Crime : साइबर ठगों ने जींद की एक महिला को डिजिटल अरेस्ट करके 81000 ठग लिए। महिला को साइबर तो के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने के लिए डेढ़ साल से ज्यादा समय तक लड़ाई लड़नी पड़ी और कोर्ट का भी सहारा लेना पड़ा। अब साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एएसपी की जांच के बाद महिला की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। साइबर ठंडी चाहिए घटना 15-16 जुलाई 2024 की है।

जिले के नरवाना के बीरबल नगर की रहने वाली नीतू (ट्रेडमार्क फाइलिंग एजेंट) इस शातिर ठगी का शिकार बनीं। हैरानी की बात यह है कि उसको इंसाफ के लिए एक पुलिस थाने से दूसरे थाने तक डेढ़ साल तक धक्के खाने पड़े। आखिरकार, एएसपी सोनाक्षी सिंह के हस्तक्षेप के बाद अब साइबर क्राइम थाना जींद में मुकदमा दर्ज हुआ है।

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साइबर थाना जींद ने यह कहकर केस नरवाना भेज दिया था कि राशि 1 लाख से कम है। नरवाना शहर थाना ने कहा कि उनके पास साइबर उपकरण नहीं हैं। नीतू ने आरोप लगाया कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जांच अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया और पुलिस अधिकारियों का व्यवहार उनके प्रति अपमानजनक रहा। अंत में नीतू को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी, जिसके बाद उनके होल्ड किए गए 5,000 रुपए वापस मिल सके।

नीतू ने बताया कि 15 व 16 जुलाई 2024 में उनके पास अलग-अलग नंबरों से कॉल आए। ठगों ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण का अधिकारी बताया। ठगों ने कहा कि उसके आधार कार्ड पर एक फर्जी सिम चल रही है, जिसका इस्तेमाल जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुआ है।

नीतू को फोन पर डराया गया कि पुलिस मेरा नंबर बंद करने वाली है, क्योंकि मेरा नाम जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल से जुड़े 538 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है। जालसाजों ने खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई का ऑफिसर बताकर बात की। उन्होंने डराया कि नीतू को मुंबई के अंधेरी ईस्ट पुलिस स्टेशन आना होगा। जब नीतू ने अपनी बीमारी का हवाला दिया, तो उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया, यानी मुझे दो दिनों तक स्काइप (Skype) वीडियो कॉल पर रहने और किसी को न बताने के लिए मजबूर किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई और टराई के फर्जी दस्तावेज दिखाए। इसके बाद, उन्होंने मेरे बैंक खातों की जांच करने के नाम पर निजी और बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश की और मुझे लगातार धमकाया। ठगों ने नीतू को भरोसा दिलाया कि उनके बैंक ट्रांजैक्शन वेरिफाई करने के बाद ही उनका नाम इस 538 करोड़ के केस से हटेगा। डर के साये में नीतू ने 50 हजार रुपए एक यूपीआई आईडी पर ट्रांसफर किए। इसके बाद 31,000 एक अन्य बैंक खाते में भेजे। जब ठगों ने डेढ़ लाख की और मांग की, तब नीतू को दोस्तों की मदद से अहसास हुआ कि उनके साथ ‘डिजिटल फ्रॉड’ हुआ है।

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17 दिसंबर 2025 को एडिशनल एसपी सोनाक्षी सिंह ने खुद नीतू के बयान दर्ज किए। मामले की जांच में पाया गया कि यह वाकई ‘डिजिटल अरेस्ट’ का गंभीर मामला है। अब बीएनएस की धारा 318(4), 319 और 61(2) के तहत मुकदमा नंबर 13 दर्ज किया गया है।
नीतू ने मानवाधिकार आयोग को भी शिकायत दी है कि लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों तत्कालीन प्रभारी व जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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